samajik kranti

Just another weblog

69 Posts

1986 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7604 postid : 321

बगावत

  • SocialTwist Tell-a-Friend

खिड़कियों से देख लो, नेताओं थोड़ा झाँककर,
आ गई जनता बगवत के लिये मैदान में।
तुम अगर चेते न अब, जनता की तुमने न सुनी,
भीड़ जायेगी बदल यह, एक दिन तूफान में।
न सिसायत यह रहेगी, न रहेंगी कुर्सियाँ,
सोई थी जनता जगाया, आम इक इंसान ने। (अरविन्द केजरीवाल)
राज्य का सूरज नहीं था डूबता जिसका कभी,
गोरो की सत्ता गई थी, तुम हो किस अभिमान में।
तुम समझते पार्टी यह, सिमटी है कुछ लोगो तक,
भीड़ है कितनी अधिक, अरविन्द के आवाहन में।
तुम समझते हो मजा सत्ता में है सबसे अधिक,
हम समझते हैं मजा बस देश पर कुर्बान में।।
  • खिड़कियों से देख लो, नेताओं थोड़ा झाँककर,
  • आ गई जनता बगवत के लिये मैदान में।
  • तुम अगर चेते न अब, न ये जनता की  सुनी,
  • भीड़ जायेगी बदल यह, एक दिन तूफान में।
  • न सिसायत यह रहेगी, न रहेंगी कुर्सियाँ,
  • सोई थी जनता जगाया, आम इक इंसान ने। (अरविन्द केजरीवाल)
  • राज्य का सूरज नहीं था डूबता जिसका कभी,
  • गोरो की सत्ता गई थी, तुम हो किस अभिमान में।
  • तुम समझते पार्टी यह, सिमटी है कुछ लोगो तक,
  • भीड़ है कितनी अधिक, अरविन्द के आवाहन में।
  • तुम समझते हो मजा सत्ता में है सबसे अधिक,
  • हम समझते हैं मजा बस देश पर कुर्बान में।।


Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sudhajaiswal के द्वारा
April 9, 2013

आदरणीय दिनेश जी, सादर अभिवादन, सुन्दर सन्देश देती हुई सुन्दर रचना के लिए बधाई |

bhagwanbabu के द्वारा
April 9, 2013

वाह … बहुत खूब… सच्चाई से ओत-प्रोत… बधाई.. http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/04/04/%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A5%8B/


topic of the week



latest from jagran